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क्या मिरे आने पे तू ऐ बुत-ए-मग़रूर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا مرے آنے پہ تو اے بت مغرور گیا
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दिल से शौक़-ए-रुख़-ए-निको न गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل سے شوق رخ نکو نہ گیا
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मशहूर हैं दिलों की मिरे बे-क़रारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور ہیں دلوں کی مرے بے قراریاں
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अक्स-ए-ख़ुश्बू हूँ बिखरने से न रोके कोई
परवीन शाकिर द्वारा
عکس خوشبو ہوں بکھرنے سے نہ روکے کوئی
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क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
परवीन शाकिर द्वारा
کیا کرے میری مسیحائی بھی کرنے والا
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जुदा जो पहलू से वो दिलबर यगाना हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
جدا جو پہلو سے وہ دلبر یگانہ ہوا
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कभी कभी तो बहुत याद आने लगते हो
जौन एलिया द्वारा
کبھی کبھی تو بہت یاد آنے لگتے ہو
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बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या
जौन एलिया द्वारा
بہت دل کو کشادہ کر لیا کیا
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रह-ए-ख़िज़ां में तलाश-ए-बहार करते रहे
فیض احمد فیض द्वारा
رہ خزاں میں تلاش بہار کرتے رہے
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उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس کو جدا ہوئے بھی زمانہ بہت ہوا
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ये रोज़-ए-हश्र का और शिकवा-ए-वफ़ा के लिये
قمر جلالوی द्वारा
یہ روز حشر کا اور شکوۂ وفا کے لئے
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बजा कि आँख में नींदों के सिलसिले भी नहीं
परवीन शाकिर द्वारा
بجا کہ آنکھ میں نیندوں کے سلسلے بھی نہیں
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हाल दिल 'मीर' का रो रो के सब ऐ माह सुना
मीर तक़ी मीर द्वारा
حال دل میرؔ کا رو رو کے سب اے ماہ سنا
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निकले है जिंस-ए-हुस्न किसी कारवाँ में
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے جنس حسن کسی کاروان میں
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दिल बर्बाद को आबाद किया है मैंने
जौन एलिया द्वारा
دل برباد کو آباد کیا ہے میں نے
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जो ज़िंदगी बची है उसे मत गँवाइए
जौन एलिया द्वारा
جو زندگی بچی ہے اسے مت گنوائیے
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दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
जौन एलिया द्वारा
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
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तेरा क़ुर्ब था कि फ़िराक़ था वही तेरी जल्वा-गरी रही
अहमद फ़राज़ द्वारा
ترا قرب تھا کہ فراق تھا وہی تیری جلوہ گری رہی
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हम तो ख़ुश थे कि चलो दिल का जुनूँ कुछ कम है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم تو خوش تھے کہ چلو دل کا جنوں کچھ کم ہے
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न शब-ओ-रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ شب و روز ہی بدلے ہیں نہ حال اچھا ہے
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