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शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
فیض احمد فیض द्वारा
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
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यह किस खलिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
فیض احمد فیض द्वारा
یہ کس خلش نے پھر اس دل میں آشیانہ کیا
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इस का ख़राम देख के जाया न जाएगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خرام دیکھ کے جایا نہ جائے گا
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मीरؔ दरिया है सुने शेर ज़ुबानी उसकी
मीर तक़ी मीर द्वारा
میرؔ دریا ہے سنے شعر زبانی اس کی
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याद-ए-ग़ज़ाल चश्माں ज़िक्र-ए-समन अज़ारاں
فیض احمد فیض द्वारा
یاد غزال چشماں ذکر سمن عذاراں
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क्या मुवाफ़िक़ हो दवा इश्क़ के बीमार के साथ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا موافق ہو دوا عشق کے بیمار کے ساتھ
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कुछ करो फ़िक्र मुझ दीवाने की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کچھ کرو فکر مجھ دوانے کی
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हम से कुछ आगे ज़माने में हुआ क्या क्या कुछ
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم سے کچھ آگے زمانے میں ہوا کیا کیا کچھ
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हर हक़ीक़त मज़ाज़ हो जाए
فیض احمد فیض द्वारा
ہر حقیقت مجاز ہو جائے
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यह जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम
فیض احمد فیض द्वारा
یہ جفائے غم کا چارہ وہ نجات دل کا عالم
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तेरी बातें ही सुनाने आए
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیری باتیں ہی سنانے آئے
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फिरते हैं अब भी दिल को गरेबाँ किए हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
پھرتے ہیں اب بھی دل کو گریباں کیے ہوئے
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कहीं सकूं न मिला दिल को बज़्म-ए-यार के बाद
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کہیں سکوں نہ ملا دل کو بزم یار کے بعد
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ग़म-ए-दुनिया ग़म-ए-हस्ती ग़म-ए-उल्फ़त ग़म-ए-दिल
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
غم دنیا غم ہستی غم الفت غم دل
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जिस जगह दौर-ए-जाम होता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جس جگہ دور جام ہوتا ہے
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शब-ए-दर्द-ओ-ग़म से अर्सा मेरे जी पे तंग था
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب درد و غم سے عرصہ مرے جی پہ تنگ تھا
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हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी
فیض احمد فیض द्वारा
ہمت التجا نہیں باقی
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हम ने सब शेर में संवारे थे
فیض احمد فیض द्वारा
ہم نے سب شعر میں سنوارے تھے
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कब ठहरे गा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
فیض احمد فیض द्वारा
کب ٹھہرے گا درد اے دل کب رات بسر ہوگی
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सभी कहें मरे ग़म-ख़्वार के अलावा भी
अहमद फ़राज़ द्वारा
سبھی کہیں مرے غم خوار کے علاوہ بھی
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