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लो हम मरीज़-ए-इश्क़ के बीमार-दार हैं
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لو ہم مریض عشق کے بیمار دار ہیں
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फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
پھر مجھے دیدۂ تر یاد آیا
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तेरी ख़ुशबू का पता करती है
परवीन शाकिर द्वारा
تیری خوشبو کا پتا کرتی ہے
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तेग़-ए-सितम से उस की मिरा सर जुदा हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیغ ستم سے اس کی مرا سر جدا ہوا
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अगर राह में उस की रक्खा है गाम
मीर तक़ी मीर द्वारा
اگر راہ میں اس کی رکھا ہے گام
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जुज़ जुर्म-ए-इश्क़ कोई भी साबित किया गुनाह
मीर तक़ी मीर द्वारा
جز جرم عشق کوئی بھی ثابت کیا گناہ
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ख़राबी कुछ न पूछो मिल्कत-ए-दिल की इमारत की
मीर तक़ी मीर द्वारा
خرابی کچھ نہ پوچھو ملکت دل کی عمارت کی
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दामन वसीअ था तो काहे को चश्म तरसा
मीर तक़ी मीर द्वारा
دامن وسیع تھا تو کاہے کو چشم ترسا
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यार अजब तरह निगह कर गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
یار عجب طرح نگہ کر گیا
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ये पैहम तल्ख़-कामी सी रही क्या
जौन एलिया द्वारा
یہ پیہم تلخ کامی سی رہی کیا
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हर धड़कन हैजानि थी हर ख़मोशी तूफ़ानी थी
जौन एलिया द्वारा
ہر دھڑکن ہیجانی تھی ہر خاموشی طوفانی تھی
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अब मुझे गुलशन से क्या जब ज़ेर-ए-दाम आ ही गया
قمر جلالوی द्वारा
اب مجھے گلشن سے کیا جب زیر دام آ ہی گیا
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इश्क़ हरचंद मिरी जान सदा खाता है
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
عشق ہرچند مری جان سدا کھاتا ہے
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मोहब्बत का जब रोज़ बाज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
محبت کا جب روز بازار ہوگا
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जो कहो तुम सो है बजा साहब
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو کہو تم سو ہے بجا صاحب
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किस शाम से उठा था मिरे दिल में दर्द सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس شام سے اٹھا تھا مرے دل میں درد سا
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लाग़र इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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क़तरा-ए-मय बस्कि हैरत से नफ़स-परवर हुआ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
قطرۂ مے بسکہ حیرت سے نفس پرور ہوا
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नाला जुज़ हुस्न-ए-तलब ऐ सितम-ईजाद नहीं
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
نالہ جز حسن طلب اے ستم ایجاد نہیں
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अपनी रुसवाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
परवीन शाकिर द्वारा
اپنی رسوائی ترے نام کا چرچا دیکھوں
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