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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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चलते हो तो चमन को चलिये कहते हैं कि बहारां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چلتے ہو تو چمن کو چلئے کہتے ہیں کہ بہاراں ہے
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आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
فیض احمد فیض द्वारा
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
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पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے
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लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना
मीर तक़ी मीर द्वारा
لذت سے نہیں خالی جانوں کا کھپا جانا
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गुल को महबूब हम क़यास किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل کو محبوب ہم قیاس کیا
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इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق ہمارے خیال پڑا ہے
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बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
فیض احمد فیض द्वारा
بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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तुम हो शरीक-ए-ग़म तो मुझे कोई ग़म नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تم ہو شریک غم تو مجھے کوئی غم نہیں
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आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ سحر نے سوزش دل کو مٹا دیا
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बरंग-ए-बू-ए-गुल इस बाग़ के हम आश्ना होते
मीर तक़ी मीर द्वारा
برنگ بوئے گل اس باغ کے ہم آشنا ہوتے
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इश्क़ में ने ख़ौफ़-ओ-ख़तर चाहिए
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں نے خوف و خطر چاہیے
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ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اے صنم تجھ کو ہم بھلا نہ سکے
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कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
کب یاد میں تیرا ساتھ نہیں کب ہات میں تیرا ہات نہیں
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तेरी नज़रों पे तसद्दुक़ आज अहल-ए-होश हैं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیری نظروں پہ تصدق آج اہل ہوش ہیں
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सहर-गह-ए-ईद में दौर-ए-सबू था
मीर तक़ी मीर द्वारा
سحر گہہ عید میں دور سبو تھا
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हमारे आगे तिरा जब कसू ने नाम लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہمارے آگے ترا جب کسو نے نام لیا
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हुस्न-ए-बुतां का इश्क़ मेरी जान हो गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حسن بتاں کا عشق مری جان ہو گیا
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