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तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
فیض احمد فیض द्वारा
تیری صورت جو دل نشیں کی ہے
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सैर के क़ाबिल है दिल सद-पारा उस नख़चीर का
मीर तक़ी मीर द्वारा
سیر کے قابل ہے دل صد پارہ اس نخچیر کا
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अंधेरे लाख छा जाएँ उजाला कम नहीं होता
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اندھیرے لاکھ چھا جائیں اجالا کم نہیں ہوتا
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आरज़ूएं हज़ार रखते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
آرزوئیں ہزار رکھتے ہیں
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रंज खींचे थे दाग़ खाए थे
मीर तक़ी मीर द्वारा
رنج کھینچے تھے داغ کھائے تھے
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इश्क़ में ज़िल्लत हुई ख़िफ़त हुई तोहमत हुई
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں ذلت ہوئی خفت ہوئی تہمت ہوئی
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दिल में ले के कशिश बंदगी की इश्क़ को आज़मा कर तो देखो
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
دل میں لے کے کشش بندگی کی عشق کو آزما کر تو دیکھو
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दुनिया के हर ख़याल से बेगाना कर दिया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
دنیا کے ہر خیال سے بیگانہ کر دیا
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काश उठें हम भी गुनाहगारों के बीच
मीर तक़ी मीर द्वारा
کاش اٹھیں ہم بھی گنہ گاروں کے بیچ
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यूँ सजा चाँद कि छलका तेरे अंदाज़ का रंग
فیض احمد فیض द्वारा
یوں سجا چاند کہ جھلکا ترے انداز کا رنگ
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जैसे हम बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम
فیض احمد فیض द्वारा
جیسے ہم بزم ہیں پھر یار طرح دار سے ہم
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चश्म-ए-मैगूं ज़रा इधर कर दे
فیض احمد فیض द्वारा
چشم میگوں ذرا ادھر کر دے
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यह किस खलिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
فیض احمد فیض द्वारा
یہ کس خلش نے پھر اس دل میں آشیانہ کیا
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आँखों में नमी आई चेहरे पे मलाल आया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آنکھوں میں نمی آئی چہرے پہ ملال آیا
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जो मिटा है तेरे जमाल पर वो हर एक ग़म से गुज़र गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جو مٹا ہے تیرے جمال پر وہ ہر ایک غم سے گزر گیا
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हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہر گھڑی پیش نظر عشق میں کیا کیا نہ رہا
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इश्क़-ए-सनम नमाज़ है है यही ज़िंदगी मिरी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
عشق صنم نماز ہے ہے یہی زندگی مری
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छूटता ही नहीं हो जिसे आज़ार-ए-मोहब्बत
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھٹتا ہی نہیں ہو جسے آزار محبت
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याद-ए-ग़ज़ाल चश्माں ज़िक्र-ए-समन अज़ारاں
فیض احمد فیض द्वारा
یاد غزال چشماں ذکر سمن عذاراں
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फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
فیض احمد فیض द्वारा
پھر آئینۂ عالم شاید کہ نکھر جائے
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