Tujhe Pukaara Hai Be-Iraada
تجھے پکارا ہے بے ارادہ
तुझे पुकारा है बे-इरादा
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंتجھے پکارا ہے بے ارادہ
جو دل دکھا ہے بہت زیادہ
Tujhe pukaara hai be-iraada
Jo dil dukha hai bahut zyaada
तुझे पुकारा है बे-इरादा
जो दिल दुखा है बहुत ज़्यादा
ندیم ہو تیرا حرف شیریں
تو رنگ پر آئے رنگ بادہ
عطا کرو اک ادائے دیریں
تو اشک سے تر کریں لبادہ
نہ جانے کس دن سے منتظر ہے
دل سر رہ گزر فتادہ
Na jaane kis din se muntazir hai
Dil sar-e-rahguzar-e-fataada
न जाने किस दिन से मुंतज़िर है
दिल सर-ए-रहगुज़र-ए-फ़तादा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू के वो अहद-साज़ शायर हैं जिन्होंने इश्क़ की नफ़ासत को इन्क़िलाबी सोच से जोड़कर दुनिया भर में शौहरत हासिल की और अपने विचारों के लिए जेल भी गए।
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