Baat Bas Se Nikal Chali Hai
بات بس سے نکل چلی ہے
बात बस से निकल चली है
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंبات بس سے نکل چلی ہے
دل کی حالت سنبھل چلی ہے
Baat bas se nikal chali hai
Dil ki halat sambhal chali hai
बात बस से निकल चली है
दिल की हालत संभल चली है
اب جنوں حد سے بڑھ چلا ہے
اب طبیعت بہل چلی ہے
یا یوں ہی بجھ رہی ہیں شمعیں
یا شب ہجر ٹل چلی ہے
Ya yun hi bujh rahi hain sham'ein
Ya shab-e-hijr tal chali hai
या यूँ ही बुझ रही हैं शमऐं
या शब-ए-हिज्र टल चली है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू के वो अहद-साज़ शायर हैं जिन्होंने इश्क़ की नफ़ासत को इन्क़िलाबी सोच से जोड़कर दुनिया भर में शौहरत हासिल की और अपने विचारों के लिए जेल भी गए।
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