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किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
فیض احمد فیض द्वारा
کس حرف پہ تو نے گوشۂ لب اے جان جہاں غماز کیا
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सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
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सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले
فیض احمد فیض द्वारा
ستم کی رسمیں بہت تھیں لیکن نہ تھی تری انجمن سے پہلے
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जहाँ अब ख़ार-ज़ारें हो गई हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جہاں اب خار زاریں ہو گئی ہیں
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शब शम्अ पर पतंग के आने को इश्क़ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب شمع پر پتنگ کے آنے کو عشق ہے
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ये मीर सितम कुश्ता किसू वक़्त जवाँ था
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ میرؔ ستم کشتہ کسو وقت جواں تھا
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जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
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तंग आग़ोश में आबाद करूँगा तुझ को
जौन एलिया द्वारा
تنگ آغوش میں آباد کروں گا تجھ کو
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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सीना है चाक जिगर पारा है दिल सब ख़ूँ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
سینہ ہے چاک جگر پارہ ہے دل سب خوں ہے
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ग़मज़े ने उस के चोरी में दिल की हुनर किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
غمزے نے اس کے چوری میں دل کی ہنر کیا
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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे
जौन एलिया द्वारा
کس سے اظہار مدعا کیجے
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कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला-ए-बीमाराना था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل شب ہجراں تھی لب پر نالہ بیمارانہ تھا
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शश-जिहत से उस में ज़ालिम बू-ए-ख़ूँ की राह है
मीर तक़ी मीर द्वारा
شش جہت سے اس میں ظالم بوئے خوں کی راہ ہے
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मौसम-ए-गुल आया है यारो कुछ मेरी तदबीर करो
मीर तक़ी मीर द्वारा
موسم گل آیا ہے یارو کچھ میری تدبیر کرو
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दिल बर्बाद को आबाद किया है मैंने
जौन एलिया द्वारा
دل برباد کو آباد کیا ہے میں نے
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हम तो ख़ुश थे कि चलो दिल का जुनूँ कुछ कम है
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم تو خوش تھے کہ چلو دل کا جنوں کچھ کم ہے
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तिरे इश्क़ में आगे सौदा हुआ था
मीर तक़ी मीर द्वारा
ترے عشق میں آگے سودا ہوا تھا
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तड़पना भी देखा न बिस्मिल का अपने
मीर तक़ी मीर द्वारा
تڑپنا بھی دیکھا نہ بسمل کا اپنے
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तंग आए हैं दिल इस जी से उठा बैठें गे
मीर तक़ी मीर द्वारा
تنگ آئے ہیں دل اس جی سے اٹھا بیٹھیں گے
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