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जी ही जी में वो जल रही होगी
جی ہی جی میں وہ جل رہی ہوگی
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अब किसी से मिरा हिसाब नहीं
اب کسی سے مرا حساب نہیں
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अपना ख़ाका लगता हूँ
اپنا خاکہ لگتا ہوں
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ग़म उस को सारी रात सुनाया तो क्या हुआ
غم اس کو ساری رات سنایا تو کیا ہوا
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जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो
جس سمت بھی دیکھوں نظر آتا ہے کہ تم ہو
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