Yak-ba-yak Shorish-e-Fughan Ki Tarah
یک بیک شورش فغاں کی طرح
यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ां की तरह
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंیک بیک شورش فغاں کی طرح
فصل گل آئی امتحاں کی طرح
Yak-ba-yak shorish-e-fughan ki tarah
Fasl-e-gul aayi imtihan ki tarah
यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ां की तरह
फ़स्ल-ए-गुल आई इम्तिहां की तरह
صحن گلشن میں بہر مشتاقاں
ہر روش کھنچ گئی کماں کی طرح
Sehan-e-gulshan mein bahr-e-mushtaqan
Har ravish khinch gayi kaman ki tarah
सहन-ए-गुलशन में बहर-ए-मुश्ताक़ान
हर रविश खिंच गई कमान की तरह
پھر لہو سے ہر ایک کاسۂ داغ
پر ہوا جام ارغواں کی طرح
Phir lahu se har ek kasa-e-dagh
Pur hua jam-e-arghawan ki tarah
फिर लहू से हर एक कासा-ए-दाग़
पुर हुआ जाम-ए-अरग़वां की तरह
یاد آیا جنون گم گشتہ
بے طلب قرض دوستاں کی طرح
Yad aaya junoon-e-gumgushta
Be-talab qarz-e-dostan ki tarah
याद आया जुनूं-ए-गुमगुश्ता
बे-तलब क़र्ज़-ए-दोस्तां की तरह

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ उर्दू के वो अहद-साज़ शायर हैं जिन्होंने इश्क़ की नफ़ासत को इन्क़िलाबी सोच से जोड़कर दुनिया भर में शौहरत हासिल की और अपने विचारों के लिए जेल भी गए।
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