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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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रफ़्तगां में जहां के हम भी हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
رفتگاں میں جہاں کے ہم بھی ہیں
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न देर में न हरम में जबीं झुकी होगी
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
نہ دیر میں نہ حرم میں جبیں جھکی ہوگی
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देख तो दिल के जाँ से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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जब तक मरे होंटों पे तेरा नाम रहेगा
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
جب تک مرے ہونٹوں پہ ترا نام رہے گا
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लब तेरे लअल-ए-नाब हैं दोनों
मीर तक़ी मीर द्वारा
لب ترے لعل ناب ہیں دونوں
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गरचह कब देखते हो पर देखो
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرچہ کب دیکھتے ہو پر دیکھو
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आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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मैं कौन हूँ ऐ हम-नफ़साँ सख़्ता जाँ हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں کون ہوں اے ہم نفساں سوختہ جاں ہوں
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तेरी सूरत जो दिल-नशीं की है
فیض احمد فیض द्वारा
تیری صورت جو دل نشیں کی ہے
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क्या कहूं तुम से मैं कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں تم سے میں کہ کیا ہے عشق
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फिर उस से तरह कुछ जो दावे की सी डाली है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پھر اس سے طرح کچھ جو دعوے کی سی ڈالی ہے
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उन के जलवों पे हम-वक्त नज़र होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ان کے جلووں پہ ہمہ وقت نظر ہوتی ہے
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हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रखे
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہر کوئی دل کی ہتھیلی پہ ہے صحرا رکھے
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हरीम-ए-शाह में देखी न ख़ानक़ाह में है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
حریم شاہ میں دیکھی نہ خانقاہ میں ہے
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बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
मीर तक़ी मीर द्वारा
بارے دنیا میں رہو غم زدہ یا شاد رہو
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दिल के म'मूरे की मत कर फ़िक्र फ़ुर्सत चाहिए
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کے معمورے کی مت کر فکر فرصت چاہیے
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