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उस का ख़याल चश्म से शब-ए-ख़्वाब ले गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خیال چشم سے شب خواب لے گیا
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ख़बर ही नहीं कैसे अंगड़ाई ले कर निगाहें उठाए कि साग़र उठाए
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
خبر ہی نہیں کیسے انگڑائی لے کر نگاہیں اٹھائے کہ ساغر اٹھائے
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सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
سب قتل ہو کے تیرے مقابل سے آئے ہیں
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तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
अहमद फ़राज़ द्वारा
ترس رہا ہوں مگر تو نظر نہ آ مجھ کو
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कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
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होता है यां जहां में हर रोज़-ओ-शब तमाशा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہوتا ہے یاں جہاں میں ہر روز و شب تماشا
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दिल गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل گرفتہ ہی سہی بزم سجا لی جائے
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सक़िया एक नज़र जाम से पहले पहले
अहमद फ़राज़ द्वारा
ساقیا ایک نظر جام سے پہلے پہلے
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अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اگرچہ زور ہواؤں نے ڈال رکھا ہے
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उन की तरफ़ से तर्क-ए-मुलाक़ात हो गई
قمر جلالوی द्वारा
ان کی طرف سے ترک ملاقات ہو گئی
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मैं भी दुनिया में हूँ इक नाल-ए-परेशाँ यक जा
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالۂ پریشاں یک جا
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अब ज़ोफ़ से ढहता है बेताबी शिताबि की
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب ضعف سے ڈھہتا ہے بیتابی شتابی کی
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क्या करूं शरह-ए-ख़स्ता जानी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کروں شرح خستہ جانی کی
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आज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
فیض احمد فیض द्वारा
عجز اہل ستم کی بات کرو
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न किसी पे ज़ख़्म अयां कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
فیض احمد فیض द्वारा
نہ کسی پہ زخم عیاں کوئی نہ کسی کو فکر رفو کی ہے
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وحشتیں بڑھتی گئیں ہجر کے آزار کے ساتھ
अहमद फ़राज़ द्वारा
وحشتیں بڑھتی گئیں ہجر کے آزار کے ساتھ
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मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलैख़ा तपाक चाहता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
مثال دست زلیخا تپاک چاہتا ہے
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भला होगा कुछ इक अहवाल उस से या बुरा होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
بھلا ہوگا کچھ اک احوال اس سے یا برا ہوگا
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अब नहीं सीने में मेरे जाए दाग़
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب نہیں سینے میں میرے جائے داغ
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रुख़-ए-निगार से है सोज़-ए-जावेदानी शम्अ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
رخ نگار سے ہے سوز جاودانی شمع
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