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जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
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इश्क़ मन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
عشق منت کش قرار نہیں
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उस ने सुकूत-ए-शब में भी अपना पयाम रख दिया
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس نے سکوت شب میں بھی اپنا پیام رکھ دیا
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बाग़-ए-आलम में रहे शादी-ओ-मातम की तरह
قمر جلالوی द्वारा
باغ عالم میں رہے شادی و ماتم کی طرح
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सोज़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ से दिल को बचाए कौन
قمر جلالوی द्वारा
سوز غم فراق سے دل کو بچائے کون
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जब हर एक शहर बलाओं का ठिकाना बन जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب ہر اک شہر بلاؤں کا ٹھکانہ بن جائے
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पाये ख़िताब क्या क्या देखे अताब क्या क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
پائے خطاب کیا کیا دیکھے عتاب کیا کیا
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मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور چمن میں تری گل پیرہنی ہے
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ग़मज़े ने उस के चोरी में दिल की हुनर किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
غمزے نے اس کے چوری میں دل کی ہنر کیا
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गुज़र जान से और डर कुछ नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
گزر جان سے اور ڈر کچھ نہیں
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हम पर तुम्हारी चाह का इलज़ाम ही तो है
فیض احمد فیض द्वारा
ہم پر تمہاری چاہ کا الزام ہی تو ہے
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सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
فیض احمد فیض द्वारा
ستم سکھلائے گا رسم وفا ایسے نہیں ہوتا
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उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس کو جدا ہوئے بھی زمانہ بہت ہوا
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करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे
अहमद फ़राज़ द्वारा
کروں نہ یاد مگر کس طرح بھلاؤں اسے
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कभी जो आँख पे गेसू-ए-यार होता है
قمر جلالوی द्वारा
کبھی جو آنکھ پہ گیسوئے یار ہوتا ہے
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यह बे-दिली है तो कश्ती से यार क्या उतरें
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ بے دلی ہے تو کشتی سے یار کیا اتریں
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कल हम ने बज़्म-ए-यार में क्या क्या शराब पी
अहमद फ़राज़ द्वारा
کل ہم نے بزم یار میں کیا کیا شراب پی
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इस मंज़र-ए-सादा में कई जाल बंधे थे
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس منظر سادہ میں کئی جال بندھے تھے
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मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مجھ کو تجھ سے جو کچھ محبت ہے
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ख़ातिर करे है जमा वो हर बार एक तरह
मीर तक़ी मीर द्वारा
خاطر کرے ہے جمع وہ ہر بار ایک طرح
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