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गिरां-ए-शब-ए-हिज्रां दो चंद क्या करते
فیض احمد فیض द्वारा
گرانئ شب ہجراں دو چند کیا کرتے
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क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
فیض احمد فیض द्वारा
قرض نگاہ یار ادا کر چکے ہیں ہم
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गरमी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तू देखो
فیض احمد فیض द्वारा
گرمئ شوق نظارہ کا اثر تو دیکھو
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हुज़ूर-ए-यार में हर्फ़-ए-इल्तिजा के रक्खे थे
Amjad Islam Amjad द्वारा
حضور یار میں حرف التجا کے رکھے تھے
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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बरश्काल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
برشکال گریۂ عاشق ہے دیکھا چاہیے
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क्या कहूं तुम से मैं कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہوں تم سے میں کہ کیا ہے عشق
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यूं न आँखें बदल मुझ से मेरे सनम
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
یوں نہ آنکھیں بدل مجھ سے میرے صنم
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है कहाँ का इरादा तुम्हारा सनम किस के दिल को अदाओं से बहलाओगे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے کہاں کا ارادہ تمہارا صنم کس کے دل کو اداؤں سے بہلاؤ گے
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या रब कोई हो इश्क़ का बीमार न होवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
یا رب کوئی ہو عشق کا بیمار نہ ہووے
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इश्क़ क्या क्या आफ़तें लाता रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق کیا کیا آفتیں لاتا رہا
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वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
وفائے وعدہ نہیں وعدۂ دگر بھی نہیں
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हर हक़ीक़त मज़ाज़ हो जाए
فیض احمد فیض द्वारा
ہر حقیقت مجاز ہو جائے
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सह्ल यूं राह-ए-ज़िंदगी की है
فیض احمد فیض द्वारा
سہل یوں راہ زندگی کی ہے
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किसी गुमां पे तवक्कुअ ज़्यादा रखते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
کسی گماں پہ توقع زیادہ رکھتے ہیں
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जब तुझे याद करें कार-ए-जहाँ खींचता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب تجھے یاد کریں کار جہاں کھینچتا ہے
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इश्क़ ऐसा अजीब दरिया है
Amjad Islam Amjad द्वारा
عشق ایسا عجیب دریا ہے
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इश्क़ में कुछ नहीं दवा से नफ़ा
मीर तक़ी मीर द्वारा
عشق میں کچھ نہیں دوا سے نفع
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खुली आँखों में सपना झाँकता है
परवीन शाकिर द्वारा
کھلی آنکھوں میں سپنا جھانکتا ہے
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फिर उस से तरह कुछ जो दावे की सी डाली है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پھر اس سے طرح کچھ جو دعوے کی سی ڈالی ہے
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