ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
इश्क़
सभी
228
अशआर
0
ग़ज़ल
228
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
ये आलम-ए-शौक़ का देखा न जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
یہ عالم شوق کا دیکھا نہ جائے
0
सुरख़ियां क्यों ढूंढ कर लाऊं फ़साने के लिए
قمر جلالوی द्वारा
سرخیاں کیوں ڈھونڈھ کر لاؤں فسانے کے لئے
0
कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
0
जहाँ अब ख़ार-ज़ारें हो गई हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جہاں اب خار زاریں ہو گئی ہیں
0
क्या हक़ीक़त कहूँ कि क्या है इश्क़
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا حقیقت کہوں کہ کیا ہے عشق
0
तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
تیرے در سے نہ اٹھا ہوں نہ اٹھوں گا اے دوست
0
काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या से क्या कर दिया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کافر عشق کو کیا سے کیا کر دیا
0
शेख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
فیض احمد فیض द्वारा
شیخ صاحب سے رسم و راہ نہ کی
0
जिस सम्त भी देखूँ नज़र आता है कि तुम हो
अहमद फ़राज़ द्वारा
جس سمت بھی دیکھوں نظر آتا ہے کہ تم ہو
0
अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रखा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اگرچہ زور ہواؤں نے ڈال رکھا ہے
0
चाक पीराहनी-ए-गुुल को सबा जानती है
अहमद फ़राज़ द्वारा
چاک پیراہنیٔ گل کو صبا جانتی ہے
0
सब क़रीने इसी दिल दार के रख देते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب قرینے اسی دل دار کے رکھ دیتے ہیں
0
शहर से यार सवार हुआ जो सवाद में ख़ूब ग़ुबार है आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
شہر سے یار سوار ہوا جو سواد میں خوب غبار ہے آج
0
शब शम्अ पर पतंग के आने को इश्क़ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب شمع پر پتنگ کے آنے کو عشق ہے
0
नाज़-ए-चमन वही है बुलबुल से गो ख़िज़ां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ناز چمن وہی ہے بلبل سے گو خزاں ہے
0
यह चश्म आईना-दार-ए-रू थी किसू की
मीर तक़ी मीर द्वारा
یہ چشم آئینہ دار رو تھی کسو کی
0
गर कुछ हो दर्द आईना यूं चर्ख़-ए-ज़िश्त में
मीर तक़ी मीर द्वारा
گر کچھ ہو درد آئینہ یوں چرخ زشت میں
0
ख़ूब है शौक़ का यह पहलू भी
जौन एलिया द्वारा
خوب ہے شوق کا یہ پہلو بھی
0
ता ब-मक़दूर इंतज़ार किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
تا بہ مقدور انتظار کیا
0
दिल-ए-बेताब आफ़त है बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل بیتاب آفت ہے بلا ہے
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें