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जिन के लिए अपने तो यूँ जान निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن کے لیے اپنے تو یوں جان نکلتے ہیں
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वह और होंगे जिन को हरम की तलाश है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
وہ اور ہوں گے جن کو حرم کی تلاش ہے
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मिसाल-ए-दस्त-ए-ज़ुलैख़ा तपाक चाहता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
مثال دست زلیخا تپاک چاہتا ہے
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कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہاں تک غیر جاسوسی کے لینے کو لگا آوے
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जराहत तोहफ़ा, अलमास अरमग़ां, दाग़-ए-जिगर हदिया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جراحت تحفہ الماس ارمغاں داغ جگر ہدیہ
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लाغر इतना हूँ कि गर तू बज़्म में जा दे मुझे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
لاغر اتنا ہوں کہ گر تو بزم میں جا دے مجھے
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हर्फ़ ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है
परवीन शाकिर द्वारा
حرف تازہ نئی خوشبو میں لکھا چاہتا ہے
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मर मर गए नज़र कर उस के बरहना तन में
मीर तक़ी मीर द्वारा
مر مر گئے نظر کر اس کے برہنہ تن میں
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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
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नक़्क़ाश देख तो मैं क्या नक़्श-ए-यार खेंचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
نقاش دیکھ تو میں کیا نقش یار کھینچا
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तंग आग़ोश में आबाद करूँगा तुझ को
जौन एलिया द्वारा
تنگ آغوش میں آباد کروں گا تجھ کو
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जौन एलिया द्वारा
کتنے عیش سے رہتے ہوں گے کتنے اتراتے ہوں گے
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इश्क़ मन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
فیض احمد فیض द्वारा
عشق منت کش قرار نہیں
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معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
अहमद फ़राज़ द्वारा
معاف کر مری مستی خدائے عز و جل
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कहते हो इत्तिहाद है हम को
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہتے ہو اتحاد ہے ہم کو
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
मीर तक़ी मीर द्वारा
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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ब नाला हासिल-ए-दिल-बस्तगी फ़राहम कर
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
بہ نالہ حاصل دل بستگی فراہم کر
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नहीं वसवस जी गँवाने के
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہیں وسواس جی گنوانے کے
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इक हुनर था कमाल था क्या था
परवीन शाकिर द्वारा
اک ہنر تھا کمال تھا کیا تھا
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