ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
इश्क़
सभी
228
अशआर
0
ग़ज़ल
228
0
पसंदीदा
पसंदीदा
शेयर करें
क्रम से लगाएं
लोकप्रियता
वर्णानुक्रम
0
अधर आ कर शिकार-अफ़गन हमारा
मीर तक़ी मीर द्वारा
ادھر آ کر شکار افگن ہمارا
0
मैं भी दुनिया में हूँ इक नाला-ए-परेशाँ यक जा
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالہ پریشاں یک جا
0
दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
जौन एलिया द्वारा
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
0
मेरे दाग़-ए-दिल वो चराग़ हैं नहीं निस्बतें जिन्हें शाम से
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مرے داغ دل وہ چراغ ہیں نہیں نسبتیں جنہیں شام سے
0
तेरा ग़म रहे सलामत यही मेरी ज़िंदगी है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ترا غم رہے سلامت یہی میری زندگی ہے
0
जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو تو ہی صنم ہم سے بے زار ہوگا
0
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
فیض احمد فیض द्वारा
راز الفت چھپا کے دیکھ لیا
0
ग़म ब-दिल शुक्र ब-लब मस्त-ओ-ग़ज़ल ख़्वाँ चलिए
فیض احمد فیض द्वारा
غم بہ دل شکر بہ لب مست و غزل خواں چلیے
0
शिगोफ़्त-ए-गुल की सदा में रंग-ए-चमन में आओ
अहमद फ़राज़ द्वारा
شگفت گل کی صدا میں رنگ چمن میں آؤ
0
न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
0
बुरक़ा उठा था रुख़ से मिरे बद-गुमाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
برقع اٹھا تھا رخ سے مرے بد گمان کا
0
बज़्म में जो तेरा ज़हूर नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
بزم میں جو ترا ظہور نہیں
0
फ़लक करने के क़ाबिल आसमाँ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
فلک کرنے کے قابل آسماں ہے
0
सुना है हाल तिरे कुश्तगाँ बेचारों का
मीर तक़ी मीर द्वारा
سنا ہے حال ترے کشتگاں بیچاروں کا
0
तिरे इश्क़ में आगे सौदा हुआ था
मीर तक़ी मीर द्वारा
ترے عشق میں آگے سودا ہوا تھا
0
रहे ख़याल तनक हम भी रू सियाहों का
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہے خیال تنک ہم بھی رو سیاہوں کا
0
ग़ाफ़िल ब वहम-ए-नाज़ ख़ुद-आरा है वर्ना याँ
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
غافل بہ وہم ناز خود آرا ہے ورنہ یاں
0
बे कसाना जी गिरफ़्तारी से शिवन में रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے کسانہ جی گرفتاری سے شیون میں رہا
0
पुश्त-ए-पा मारी बस-कि दुनिया पर
मीर तक़ी मीर द्वारा
پشت پا ماری بسکہ دنیا پر
0
दामान-ए-कोह में जो मैं ढाढ़ मार रोया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دامان کوہ میں جو میں ڈاڑھ مار رویا
← पिछला
अगला →
कवियों की सूची
कवियों
और जानें